तेहरान, 16 मार्च। पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती टकराव की स्थिति ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को गहरा कर दिया है। विशेष रूप से ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। यह द्वीप ईरान के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल का निर्यात इसी मार्ग से होता है।
हाल ही में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद यह आशंका जताई गई कि खार्ग द्वीप के आसपास स्थित ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी कार्रवाई में खार्ग द्वीप की तेल सुविधाओं को सीधे तौर पर निशाना नहीं बनाया गया। इसके बावजूद ईरान ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि देश की तेल सुविधाओं या ऊर्जा अवसंरचना पर हमला किया गया, तो उसका जवाब पूरे क्षेत्र में मौजूद रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर दिया जाएगा। उनका कहना है कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक ढांचे की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
उन्होंने अमेरिका पर डबल स्टैंडर्ड होने का आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ समय पहले तक अमेरिका कई देशों पर दबाव बना रहा था कि वे रूस से तेल खरीदना बंद करें। लेकिन, अब वही अमेरिका दुनिया के देशों से रूसी तेल खरीदने की अपील कर रहा है। अराघची ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ये स्थिति अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बड़ी विडंबना को दिखाने का काम करती है।
इसी बीच पश्चिम एशिया के कई देशों में सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे का आकलन किया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की ओर से संभावित जवाबी कार्रवाई में बंदरगाहों, तेल रिफाइनरियों, ऊर्जा संयंत्रों और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा उन अमेरिकी कंपनियों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर भी खतरा मंडरा रहा है, जिनके क्षेत्रीय मुख्यालय संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य खाड़ी देशों में स्थित हैं।
बढ़ते खतरे को देखते हुए कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कई कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का फैसला किया है, जबकि कुछ कार्यालयों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। क्षेत्र में काम कर रहे कर्मचारियों को संभावित हमलों के मद्देनज़र सुरक्षा निर्देश भी जारी किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा ढांचे या तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। फिलहाल पश्चिम एशिया में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।




