वाशिंगटन/यरूशलम, 16 मार्च। इजरायल पर ईरान के एक और बैलिस्टिक मिसाइल हमले के बाद मध्य इजरायल के कई इलाकों में दहशत फैल गई। आपातकालीन सेवाओं के अनुसार इस हमले में दो लोग हल्के रूप से घायल हो गए। दोनों घायल पुरुषों की उम्र लगभग पचास वर्ष बताई जा रही है। उन्हें इजरायल की राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा के कार्यकर्ताओं ने प्राथमिक उपचार दिया।
राहत एवं बचाव दल के मुताबिक जिस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया, उसमें क्लस्टर बम वारहेड लगा हुआ था। यह वारहेड हवा में फटकर कई छोटे-छोटे विस्फोटकों को एक बड़े इलाके में फैला देता है। इन छोटे बमों के गिरने से कई रिहायशी इलाकों में नुकसान हुआ और कुछ घरों में आग लगने की घटनाएं भी सामने आईं।
इजरायली पुलिस द्वारा जारी फुटेज में एक क्लस्टर म्यूनिशन के जमीन पर गिरने का क्षण देखा जा सकता है। जैसे ही यह विस्फोटक जमीन से टकराया, जोरदार धमाका हुआ और आसपास मलबा फैल गया। इसके तुरंत बाद आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और इलाके को सुरक्षित करने का काम शुरू किया।
अधिकारियों के अनुसार मिसाइल ने अपने मुख्य वारहेड को हवा में ही खोल दिया था, जिसके बाद दर्जनों छोटे-छोटे बम अलग-अलग दिशाओं में गिरने लगे। यही कारण है कि विस्फोट कई जगहों पर हुए और एक बड़ा इलाका इसकी चपेट में आ गया।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के समय में ईरान इजरायल की उन्नत वायु रक्षा प्रणाली को चुनौती देने के लिए क्लस्टर म्यूनिशन वाले बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। क्लस्टर एम्यूनिशन का उद्देश्य एक बड़े क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना होता है, क्योंकि एक ही मिसाइल से कई छोटे बम गिरते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक छोटे बम या “बॉम्बलेट” में लगभग 11 पाउंड तक विस्फोटक सामग्री हो सकती है। सामान्य तौर पर ईरान के अधिकांश बैलिस्टिक मिसाइल लगभग 24 बॉम्बलेट ले जा सकते हैं। हालांकि ईरान के सबसे शक्तिशाली मिसाइलों में से एक खुर्रम शहर बैलेस्टिक मिसाइल कथित तौर पर 80 तक छोटे विस्फोटक ले जाने में सक्षम है।
जब ये बॉम्बलेट मिसाइल से ऊंचाई पर छोड़े जाते हैं, तो वे घरों, सड़कों, दुकानों और खुले मैदानों पर अनियमित रूप से गिरते हैं, जिससे नुकसान का दायरा बहुत बड़ा हो जाता है। एक
अमेरिकी समाचार चैनल हालिया जांच में दो अलग-अलग ईरानी क्लस्टर हमलों का विश्लेषण किया गया। जांचकर्ताओं को ऐसे हमलों में 7 से 8 मील तक फैले इलाकों में विस्फोटों के निशान मिले।
इस तरह के हमलों ने क्षेत्र में तनाव और असुरक्षा की भावना को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के हथियारों का इस्तेमाल जारी रहा तो संघर्ष और अधिक विनाशकारी रूप ले सकता है।





