कानूनी प्रक्रिया पर उठे सवाल
नई दिल्ली/शिमला, 27 फरवरी। कथित यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच इंटरस्टेट कार्रवाई की प्रक्रिया पर विवाद सामने आया है। बुधवार रात शुरू हुआ यह टकराव गुरुवार सुबह करीब छह बजे समाप्त हुआ, लेकिन इस घटना ने राज्यों के बीच गिरफ्तारी के कानूनी प्रोटोकॉल पर बहस छेड़ दी है।
हिमाचल प्रदेश पुलिस ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने कानून का उल्लंघन करते हुए 20 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ ‘शर्टलेस’ विरोध प्रदर्शन से जुड़े तीन लोगों को शिमला के एक रिसॉर्ट से बिना सूचना “किडनैप” किया। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कार्रवाई को वैधानिक बताया है।
अधिकार क्षेत्र और ट्रांजिट रिमांड का नियम
विशेषज्ञों के अनुसार पुलिस राज्य सूची का विषय है और सामान्यतः किसी राज्य की पुलिस का अधिकार क्षेत्र उसी राज्य तक सीमित होता है। ऐसे में दूसरे राज्य से आरोपी को हिरासत में लेने पर ट्रांजिट रिमांड लेना आवश्यक माना जाता है, जिससे आरोपी को संबंधित अधिकार क्षेत्र में ले जाया जा सके। सुप्रीम कोर्ट की 2023 की एक टिप्पणी में भी स्पष्ट किया गया था कि आरोपी को एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाने से पहले स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर ट्रांजिट रिमांड प्राप्त करना पुलिस की जिम्मेदारी है।
स्थानीय पुलिस को सूचना देने पर मतभेद
इंटरस्टेट गिरफ्तारियों में प्रायः स्थानीय पुलिस को सूचना देना प्रोटोकॉल का हिस्सा माना जाता है। हिमाचल पुलिस का दावा है कि दिल्ली पुलिस की टीम ने शिमला में कार्रवाई से पहले स्थानीय अधिकारियों को अवगत नहीं कराया।
हालांकि, पूर्व पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील या गोपनीय ऑपरेशन में पहले से सूचना न देने की सीमित छूट भी रहती है, ताकि जानकारी लीक होने और आरोपी के फरार होने की आशंका कम हो सके।
दिल्ली हाई कोर्ट समिति की सिफारिशें
इंटरस्टेट गिरफ्तारी के मानकों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा गठित समिति ने 2019 में कई दिशानिर्देश सुझाए थे। इनमें जांच अधिकारी द्वारा राज्य के बाहर गिरफ्तारी की आवश्यकता लिखित रूप में दर्ज करना, संभव हो तो मजिस्ट्रेट से वारंट लेना, दूसरे राज्य की पुलिस से संपर्क का प्रयास करना तथा स्थानीय थाने में कार्रवाई का रिकॉर्ड दर्ज कराना शामिल है।
समिति ने यह भी कहा था कि गिरफ्तार व्यक्ति को राज्य से बाहर ले जाने से पहले वकील से परामर्श का अवसर दिया जाना चाहिए और वापसी पर स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड में संबंधित प्रविष्टि करानी चाहिए।
भरोसे की कमी भी बनती है कारण
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि राज्यों की एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और सूचना लीक होने की आशंका अक्सर ऐसे विवादों को जन्म देती है। कई मामलों में स्थानीय पुलिस को गिरफ्तारी के बाद ही सूचित किया जाता है, जिससे टकराव की स्थिति बन सकती है।
इस घटनाक्रम ने इंटरस्टेट गिरफ्तारी के स्पष्ट और समान रूप से लागू प्रोटोकॉल की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है।





