नई दिल्ली, 4 अप्रैल। उत्तरी और पूर्वी अफगानिस्तान के साथ ही पश्चिमी पाकिस्तान में शुक्रवार देर रात 5.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे अफगानिस्तान में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई। भूकम्प के झटके पूरे उत्तरी भारत में महसूस किए गए।
यूरो-मेडिटेरेनियन सीस्मोलॉजिकल सेंटर और अमर जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, भूकंप का केंद्र हिंदू कुश पर्वत श्रृंखला में था, जो अफगानिस्तान के कुंदुज़ से लगभग 150 किलोमीटर पूर्व में स्थित है। जम्मू और कश्मीर, दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के निवासी भूकंप के झटके महसूस होते ही अपने घरों से बाहर निकल आए।
रेड क्रॉस के अनुसार, अफगानिस्तान में अक्सर भूकंप आते रहते हैं, खासकर हिंदू कुश क्षेत्र में, जो एक अत्यधिक सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र में स्थित है। अफगानिस्तान की भूकंपों के प्रति संवेदनशीलता का संबंध इसकी भौगोलिक स्थिति से है, जो भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव वाले क्षेत्र में स्थित है। देश के कुछ हिस्सों से, जिसमें हेरात क्षेत्र भी शामिल है, एक बड़ी फॉल्ट लाइन भी गुजरती है।
संयुक्त राष्ट्र मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय का कहना है कि अफगानिस्तान भूकंप, भूस्खलन और मौसमी बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। बार-बार आने वाले भूकंप के झटके उन समुदायों के लिए स्थिति को और भी बदतर बना देते हैं, जो पहले से ही दशकों के संघर्ष और सीमित विकास की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, ऐसे में उनमें इन लगातार आघातों को झेलने की क्षमता बहुत कम रह जाती है।





