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शक्ति, भक्ति और समर्पण का महापर्व: क्यों और कैसे मनाई जाती है हनुमान जयंती?

## चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को देशभर में हनुमान जयंती का पर्व अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। संकटमोचन हनुमान को भगवान शिव का 11वां रुद्रावतार माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और बजरंगबली की विशेष पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

क्यों मनाई जाती है हनुमान जयंती?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अंजनी पुत्र हनुमान का जन्म चैत्र पूर्णिमा के दिन सूर्योदय के समय हुआ था। राजा दशरथ द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ से प्राप्त खीर का एक भाग जब एक चील लेकर उड़ गई और उसे माता अंजनी के हाथों में गिरा दिया, तब पवन देव के आशीर्वाद से हनुमान जी का जन्म हुआ। इसी कारण उन्हें ‘पवनपुत्र’ भी कहा जाता है। हनुमान जी को कलियुग का जागृत देवता माना जाता है, जो अजर-अमर हैं।

हनुमान जयंती का महत्व

शास्त्रों में हनुमान जी को सेवा, समर्पण और अटूट भक्ति का प्रतीक माना गया है। इस दिन का महत्व निम्नलिखित कारणों से है:

संकटों से मुक्ति: मान्यता है कि इस दिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करने से सभी प्रकार के ग्रह दोष और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।

आत्मबल की प्राप्ति: युवा पीढ़ी के लिए हनुमान जी अनुशासन और अपार शक्ति के प्रेरणा स्रोत हैं।

शनि दोष से राहत: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हनुमान जी की पूजा करने वाले भक्तों को शनिदेव कभी परेशान नहीं करते।

कैसे मनाया जाता है यह पर्व?

भक्त सुबह स्नान के बाद मंदिरों में जाकर हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सिंदूर चढ़ाने से रामभक्त प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मंदिरों में सुंदरकांड का पाठ, अखंड रामायण और भंडारों का आयोजन किया जाता है। बूंदी के लड्डू और इमरती का भोग लगाना इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

विशेष संदेश:

हनुमान जयंती केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के विकारों (काम, क्रोध, लोभ) को मिटाकर मानवता की सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का दिन है।

तिथि: चैत्र शुक्ल पूर्णिमा।

मंत्र: ‘ॐ हनुमते नमः’ का जाप।

प्रसाद: बूंदी के लड्डू और चने-चिरौंजी का वितरण।

शुभ मुहूर्त: सूर्योदय से लेकर पूरे दिन भक्ति का विशेष योग।

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