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रसोई गैस की कालाबाजारी पर दिल्ली सरकार सख्त, गोदाम से एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री पर रोक

नई दिल्ली, 6 अप्रैल। दिल्ली सरकार ने राजधानी में रसोई गैस वितरण संबंधी नियमों में महत्वपूर्ण परिवर्तन करते हुए डिस्ट्रीब्यूशन गोदामों से एलपीजी सिलेंडरों की सीधी बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। ऐसा रसोई गैस की कालाबाजारी पूरी तरह रोकने के लिए किया गया है।

दिल्ली सरकार के आदेश में कहा गया है कि सीधे गोदाम से सिलेंडरों की बिक्री गैर-कानूनी है और इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। लोगों तक गैस की पहुंच को बेहतर बनाने के लिए, खासकर उन लोगों के लिए जिनके पास पते का सही सबूत नहीं है, सरकार ने पूरे शहर में पांच किलो वाले छोटू सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ा दी है।

दिल्ली सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई से जुड़े नियमों को सख्त कर दिया है। अब उन इलाकों में जहाँ पाइप वाली नेचुरल गैस (पीएनजी) का इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, वहां के व्यवसायों के लिए पीएनजी कनेक्शन लेना या उसके लिए औपचारिक रूप से आवेदन करना अनिवार्य होगा।

खाद्य, आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि संशोधित नियमों के तहत, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल उपभोक्ताओं को एलपीजी की सप्लाई तभी मिलेगी, जब वे संबंधित तेल मार्केटिंग कंपनी के साथ रजिस्टर्ड हों और जहां नेटवर्क भी मौजूद हो। जिन इलाकों में अभी तक पीएनजी का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं पहुंचा है, वहां व्यवसायों को एक आवेदन जमा करना होगा जिसमें यह बताया गया हो कि नेटवर्क उपलब्ध होने पर वे पीएनजी में बदलना चाहते हैं। इस तरह, धीरे-धीरे स्वच्छ ईंधन की ओर बढ़ने को बढ़ावा दिया जाएगा।

आदेश में कहा गया है, “कमर्शियल गैस उपभोक्ताओं को सप्लाई करते समय, आयल मार्केटिंग कंपनी कम से कम एक बार दस्तावेज़ों की जांच करेंगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उपभोक्ता आयल मार्केटिंग कंपनी के साथ रजिस्टर्ड है और उसने या तो पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन किया है, या एक आवेदन जमा किया है जिसमें पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध होने पर उसे लेने की इच्छा जताई गई है।”

हालांकि, आदेश यह भी कहा गया है कि जिन व्यवसायों को खास ज़रूरतों के लिए पीएनजी के साथ-साथ एलपीजी की भी ज़रूरत होती है, वे विभाग के अतिरिक्त आयुक्त को आवेदन करके और अपनी ज़रूरतों का पूरा ब्योरा देकर छूट की मांग कर सकते हैं। आदेश में कहा गया है, “आयल मार्केटिंग कंपनी ऐसे आवेदनों को इकट्ठा करके, जल्द से जल्द फैसला लेने के लिए अतिरिक्त आयुक्त को सौंप सकती हैं। अतिरिक्त आयुक्त तीनों तेल मार्केटिंग कंपनियों से सलाह-मशविरा कर ऐसे मामलों का तुरंत निपटारा करेंगे।” सरकार ने कहा कि बाकी नीतिगत ढांचा, जिसे 26 मार्च को एक बाद के परिशिष्ट के साथ अधिसूचित किया गया था, अपरिवर्तित रहेगा।

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