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नांगलोई में समस्याओं का अम्बार

चहुंओर गंदगी, शौचालय जीर्णशीर्ण लेकिन नहीं है इलाके का कोई पुरसांहाल

नईदिल्ली, 5 मार्च। नांगलोई का वार्ड नंबर 34 एक ऐसा क्षेत्र है जहां लगभग 80 से 90 हजार लोग निवास करते हैं। इस आबादी में लगभग 50% अनुसूचित जाति के लोग हैं और बाकी बड़ी संख्या मुस्लिम समुदाय की है। यहां की वर्तमान निगम पार्षद हेमलता हैं,जो आम आदमी पार्टी से हैं। लेकिन, स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उनके कार्यकाल में पूरा नांगलोई गंदगी और कूड़े से पटा पड़ा है।

बदहाल व्यवस्था और ‘निष्क्रिय’ शौचालय

क्षेत्र में एमसीडी द्वारा एक शौचालय बनवाया तो गया है, लेकिन वह किसी काम का नहीं रह गया है। न तो वहां सफाई होती है और न ही रखरखाव का कोई इंतजाम है। पूरा शौचालय जीर्णशीर्ण होकर टूट चुका है। स्थिति इतनी विकट है कि शौचालय के बाहर कूड़े का ढेर लगा रहता है, जिससे उठने वाली दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

स्थानीय निवासियों की पीड़ा

स्थानीय निवासी अरविन्द का कहना है: “पूरी सड़क पर हर समय कूड़ा बिखरा रहता है। सफाईकर्मी आते तो हैं, पर उनके जाने के तुरंत बाद फिर वही स्थिति हो जाती है। कूड़ा कभी खत्म ही नहीं होता।”

संजय की शिकायत: “कूड़ेदान की बाउंड्री (सीमा) टूट चुकी है, जिससे सारा कचरा सड़कों पर फैल जाता है। यहाँ से निकलना और आना-जाना बहुत मुश्किल हो गया है। पास में ही स्कूल है, जहां छोटे-छोटे बच्चे इसी गंदगी के बीच से होकर गुजरने को मजबूर हैं। पार्षद इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं।”

देव का तर्क: “एमसीडी काम तो करती है, लेकिन सही तरीके से नहीं। अगर काम ईमानदारी और सही योजना से हो, तो जनता को इतनी परेशानी न झेलनी पड़े। निगम पार्षद बिल्कुल सक्रिय नहीं हैं।”

इस गंदगी के ढेर के पास ही स्कूल, अंबेडकर भवन जो की एक बारात घर हैं जैसी महत्वपूर्ण जगहें हैं। हर रोज़ हज़ारों लोग यहां से गुज़रते हैं। चुनाव के समय ‘दिल्ली को चमकाने’ के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इतनी गंदगी के बीच रहने से बच्चों और आम जनता के बीमार होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अफ़सोस कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर मौन है।

सलीम का कहना है कि 3-4 साल से जब से नई परिषद बनी है, तब से यहाँ का बुरा हाल है। शिकायत करने का भी कोई असर नहीं पड़ता। सारे नेता चोर हैं, सारे अपनी जेब भरने आते हैं।

वही बादल ने कहा कि हमारे यहां किसी के पास शौचालय नहीं बना हुआ। एक शौचालय था यहां, वो भी अब तोड़ दिया। अब हमारी बहन-बेटी कहां जाएंगी? राजेन्द्र लाडला प्रधान है यहां के, कोई देखने नहीं आता। हेमलता पार्षद हैं, वो भी नहीं आतीं। यहाँ जब वोटिंग का टाइम होता है, तभी आते हैं ये सब। इस बार कोई वोट के लिए आया तो सभी लोग जूते-चप्पल से मारेंगे इन लोगों को। टूटे हुए शौचालय में ही सब लोग जाते हैं, अगर यह किसी के ऊपर गिर पड़े तो क्या होगा? कौन जिम्मेदार होगा इसका?

चत्तर सिंह ने बताया की यहां एमसीडी का एक भी काम जनहित मे नहीं किया गया है, साथ ही उन्होंने इलाके मे बना एक शौचालय मैजेसटिक न्यूज के संवाददाता को दिखाया और प्रशासन पर सवाल खड़े किए की क्या किसी नेता का बच्चा यहां बेठ कर शौच कर सकता है ? साथ ही उन्होंने स्थानीय पार्षद हेमलता को भी खुली चुनौती दी अगर वो खुद आकार यहां के शौचालय का इस्तेमाल कर ले तो में उसे 1 लाख रुपए का ईनाम दूंगा । इलाके में समस्याओं का भंडार है।

चेतन ने बताया की यहां विकास का काम ज़ीरो है जिसको यकीन न हो वो हमारे वार्ड हमारे क्षेत्र आए हम दिखाते है पार्षद हेमलता का काम यहां कोई काम नहीं हुआ कूड़ा कर्कट फ़ैला हुआ है सड़कें टूटी पड़ी है।

बंटी ने बताया की हमारा ये पार्षद बस लोगों को गुमराह कर रहा है विकास के नाम पर केवल यहां जुमला किया गया था लेकिन काम कुछ नहीं हुआ। साथ ही बंटी बोले वार्ड के अंदर पार्षद ने कोई भी एक काम कंस्ट्रक्शन का किया हो तो मुझे दिखा दो मे अपनी गर्दन कटवाने को तैयार हूँ। यए बात उन्होंने दावे के साथ इस बात को कहा, उन्होंने बताया की आसपास के वार्डों मे पार्कों की स्थिति देखिए लेकिन हमारी पार्षद ऐसे काम क्यू नहीं करते ?

एक छोटे से मोहल्ले की तंग गलियों में नाराजगी और मायूसी की गूँज साफ सुनाई दे रही है। यह गुस्सा किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समुदाय का है जो पिछले कई वर्षों से बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। सलीम, जो इसी मोहल्ले का निवासी है, बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखता है। उसका कहना है कि जब से तीन-चार साल पहले नई परिषद का गठन हुआ है, इलाके की हालत बद से बदतर हो गई है। वह कहता है, “हमने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन हमारी सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसा लगता है जैसे इन नेताओं को सिर्फ अपनी जेबें भरने से मतलब है, जनता के दुखों से नहीं।” वह मोहल्ले में एकमात्र शौचालय के टूटने का जिक्र करते हुए भावुक हो जाता है। वह पूछता है, “सरकार ‘स्वच्छ भारत’ की बात करती है, लेकिन हमारे यहाँ जो एक शौचालय था, उसे भी तोड़ दिया गया। अब घर की बहू-बेटियाँ कहाँ जाएँगी? उनकी सुरक्षा और गरिमा का क्या?”

लोगों का आरोप है कि चुनाव जीतने के बाद से इन जनप्रतिनिधियों ने यहाँ कदम तक नहीं रखा। बादल गुस्से में कहता है, “ये नेता सिर्फ वोट के समय नजर आते हैं। इस बार अगर कोई वोट माँगने आया, तो मोहल्ले के लोग उन्हें जूते-चप्पल लेकर खदेड़ देंगे।” आज स्थिति यह है कि लोग उसी जर्जर और टूटे हुए शौचालय का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। डर इस बात का है कि वह जर्जर ढांचा कभी भी किसी मासूम पर गिर सकता है। मोहल्ले का हर नागरिक बस यही सवाल पूछ रहा है— “अगर कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?”

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